हमारे ऋषियों नें मुहूर्त के प्रकरण में कुछ ऐसे भी मुहूर्त का अनुसंधान किया है ,जिसमें किसी अशुभता दृष्टिगत रहते हुये भी मांगलिक कार्य निर्विघ्नता पूर्वक सम्पन्न किया जा सकता है। जिसको अबूझ मुहूर्त का नाम दिया जो निम्न प्रकार से हैं --
१ - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा {नूतन संवत्स }को अबूझ मूहूर्त माना गया है ।
२ - चैत्र शुक्ल पक्ष रामनवमी को भगवान मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम को जन्मोत्सव आता है यह संयोग अपने आप में विशेष पर्व बन चुका है ,इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है ।
३ - वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया श्रीपरशुराम जयन्ती मनाई जाती है ,इसे भी अबूझ मुहूर्त माना गया है ।
४ - वैशाख शुक्ल पक्ष श्री जानकी नवमी को सीता जी की जयन्ती मनाई जाती है ,इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है ।
५ - वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को {पीपल पूर्णिमा} को अबूझ मुहूर्त माना गया है ।
६ - ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी {गंगा दशहरा} को अबूझ मुहूर्त माना गया है ।
७ - आषाढ़ शुक्ल नवमी {भड़ल्या नवमी} को अबूझ मुहूर्त माना गया है ।
८ - आश्विन शुक्ल दशमी को विजय पर्व होने के नाते अबूझ मुहूर्त माना गया है ।
९ - माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को {वागीश्वरी जयन्ती}सरस्वती पूजा का पर्व आता है,इसे अबूझ मुहूर्त माना गया है ।
१० - फाल्गुन शुक्ल पक्ष की दूज {फूलेरा दूज} को अबूझ मुहूर्त माना गया है ।
११ - फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा {होलिका दहन} इस तिथि का पूर्वार्द्ध भाग अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में आता है ।
उपरोक्त तिथियों में किसी भी शुभ मुहूर्त का विचार आवश्यक नहीं ये अपने आप में श्रेष्ठ मुहूर्त है ।
ज्योतिषाचार्य पं.राजीव पाठक 