1. मानवोपयोगी विविध शास्त्रों में वास्तुशास्त्र भी एक है,जो ‘वास’ यानी भवननिर्माण के सिद्धान्तों का प्रतिपादन करता है ! ‘वसति अस्मिन् इति वास्तु’— गृह, भवन, प्रासाद, दुर्ग, मन्दिर, नगर, ग्राम, विविध उद्योग और व्यापार केन्द्र, यह सभी वास्तु के अन्तर्गत आते हैं ! कूप, तड़ाग, वापी, यज्ञशाला, पर्णकुटी, गोशाला आदि भी इसी के ही अंग हैंं ! चित्रकला, मूर्तिकला, काष्ठकला, अन्यान्य शिल्पादि भी वास्तुशास्त्र के अन्तर्गत ही हैं ! वस्तुतः वास्तुकर्म शिल्पकर्म का ही पर्याय है !
2. वास्तु कोई नवीन विषय नहीं है ! विश्वकर्मा ने समस्त विश्व को ही वास्तु के रुप में प्रतिपादित किया है ! तदनुसार अखिल ब्रह्माण्ड ही वास्तुशास्त्र का प्रतिपाद्य विषय बन जाता है ! प्राग्वैदिक काल से लेकर, पौराणिक और अत्याधुनिक काल तक इसकी विशद चर्चा चली आ रही है !
३. वास्तुशास्त्र में अठारह प्रवर्तक आचार्यों का उल्लेख मिलता है —
भृगु, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वकर्मा, मय, नारद, नग्नजित, विशालाक्ष, पुरन्दर, ब्रह्मा कुमार, नन्दश, शौनक, गर्ग, वासुदेव, अनिरुद्ध, बृहस्पति और शुक्राचार्य !
4. वास्तु के देवता को वास्तोष्पति कहा जाता है ! इनकी उत्पत्ति शिव के स्वेद से मानी गयी है !
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5. स्थिर स्थिति में, वास्तुमण्डल में ईशानकोण पर अधोमुख, सुप्तावस्था में इनकी अवस्थिति कही गयी है, जिनका सिर ईशान में, तदनुसार मुड़े हुए पैर नैर्ऋत्य में हैं ! इनके मुंह से सदा तथास्तु शब्दघोष होते रहता है !
6. भवननिर्माणादि क्रम में दिये जाने वाले पिण्ड-पूजनादि से ही वास्तुदेव का पोषण होता है,और इनके आशीष से गृहादि का रक्षण होता है !
7. वास्तुदेवता की चरावस्था क्रमशः विपरीत दिशा में, तीन-तीन माह की होती है !
8. वास्तुदेव के चैतन्य और व्यावहारिक स्वरुप को ही विश्वकर्मा कहा जाता है ! इनका ही दूसरा नाम देवशिल्पी है ! दैत्यशिल्पी का कार्य करने पर इन्हें ही मयदानव के रुप में भी जाना जाता है ! मय एक जातिवेशेष का भी नाम है,जो असुरों में ख्यात है, और शिल्पकार्य में निपुण है, किंचित मतभेद से इन दोनों को अलग-अलग भी मान्यता है,और वास्तुशास्त्र के दो आदि आचार्यों के रुप में प्रतिष्ठा प्राप्त है !
9. वास्तुशास्त्र सिर्फ सामान्य शिल्पशास्त्र भर ही नहीं है,बल्कि इसके गहन ज्ञान के लिए ज्योतिष,तन्त्र आदि का भी ज्ञान रखना अति आवश्यक है !
10. वास्तुशास्त्र हमें प्राकृतिक शक्तियों का सही उपयोग कर, सुखमय जीवन जीने की कला सिखाता है !
