Yogini conditions also give the Jatakas of happiness and sorrow in their time and order according to their order. Their total number is 8 !
There is a method of worshiping the yogini whose condition is going on in the birth-magazine of the native.
1 - Mangla - In this case, the person who gets the grace of Mangala Devi, fulfills her with all kinds of happiness!
2 - Pingala - In this case, due to the grace of Goddess Pingala, all the obstacles of the person become peaceful, all the paths of wealth and progress are paved!
3 - Dhanya - In this case, due to the grace of Dhanya Devi, the native never suffers loss of money and grain!
4 - Bhramari - In this case, if Bhramari Devi is pleased, then victory on enemy side, respect in society and many benefits opportunities begin!
5 - Bhadrika - In this case, the enemy's mitigation and all the disruptions in life begin to end!
6 - Ulka - In this situation, if there is any kind of disturbance in the work done by the native, and in his condition, the person of the meteor goddess is pleased, then immediately all the actions of the person begin to gain momentum!
7 - Siddha - In this case, the family starts getting amazing results in happiness, peace, accomplishment, fame, wealth benefits etc.
8 - Sankata - In this case, as the name hurts a person due to diseases, bereavement etc., worship the Yogini in maternal form to get rid of the distress, then the Goddess is blessed!
Note - To make yogini conditions favorable, practice as follows -
From the seventh to the full moon of any Shukla Paksha of the month, complete the 5–5 thousand chanting of each Yogini Dasha Kark planet of the Karka planet related to the day of Karki planet!
Choose Ketu for Sunday, Rahu and Tuesday for the causative planet of Sankata Dasha!
Likewise for Mangla's causative planet Moon, Monday!
Sunday for Pingala!
Thursday for the planetary planet of Dhanya!
Tuesday for Bhramari's causative planet Mars!
Wednesday for the planet Mercury of Bhadrika!
Saturn for the meteor-causing planet Saturn!
Friday for the planet Venus of Siddha!
The total time of Yogini Dasha starts from 1 year and starts from 2–3–5–5–6–7 and 8 years respectively, till the winning year, the time of Yogini Dasha is going on according to the birth journal, continuously in that year Otherwise, according to the convenience of your time, you should keep using his mantra from time to time under certain conditions -
Sadhana - Desired Mantra Use yellow cloth, yellow posture, Go Ghrita lamp for meditation practice and sit down, install the Navagraha Yantra for meditation in your worship!
Every day after chanting 5 Goddess Rupas should be blessed with food by taking food from them, keep the Purnima permanently installed in the Navagraha Yantra Puja, and then keep chanting the mantra of that Yogini Devi every day. Have been
1- Mangala Devi - om Namo Mangale Mangal Karini Mangal Kuru Te Nam:
2- Pingala Devi - Om Namo Pingale Variikarini Prasid-Prasid Namastubhya!
3- Dhanya Devi - om Dhanya Mangal Karini Mangal Kuru Te Nam:
4- Bhramari Dev - Om Namo Bhramari Jaayamadheshwari Bhramariye Namah!
5- Bhadrika Devi - om Bhadrike Bhadram Dehi - Dehi Abhidram Distance Kuru Te Nam :!
6 - Ulkaa Goddess - om Ulke Vighn Nashini Kalyanam Kuru Te Nam :!
7 - Siddha Devi - Om Namo Siddhe Siddhi Dehi Namastubhya!
8 - Sankata Devi - om Heart disease in the womb - catastrophic breath! - rajjaiambe1877@gmail.com
योगिनी दशाएं भी अपने समय-काल में सुख और दुख का जातक को उनके कर्मानुसार फल देती हैं !इनकी कुल संख्याए ८ हैं !
जातक की जन्म-पत्रिका में जिस योगिनी की दशा चल रही है ,उसकी पूजा -अर्चना करने की विधि है !
१- मंगला - इस दशा में मंगला देवी की कृपा जिस व्यक्ति पर हो जाती है ,उसको हर प्रकार के सुखों से सम्पन्न कर देती है !
२-पिंगला - इस दशा में पिंगला देवी की कृपा से जातक के सारे विघ्न शान्त हो जाते हैं ,धन-धान्य और उन्नति के सारे मार्ग प्रशस्त हो जाते हैं !
३-धान्या- इस दशा में धान्या देवी की कृपा से जातक को धन-धान्य की कभी क्षति नहीं होती है !
४- भ्रामरी - इस दशा में यदि भ्रामरी देवी की कृपा हो जाय तो शत्रु पक्ष पर विजय,समाज में मान-सम्मान तथा अनेक लाभ के अवसर आने लगते हैं !
५- भद्रिका - इस दशा में शत्रु का शमन और जीवन में आए समस्त व्यवधान समाप्त होने लगते हैं !
६- उल्का - इस दशा में जातक के किए गए कार्यों में किसी भी प्रकार से यदि विघ्न आ रहे हैं और अपनी दशा में उल्का देवी की व्यक्ति पर कृपा हो जाय तो तत्काल व्यक्ति के समस्त कार्यों में गति आने लगती है !
७- सिद्धा- इस दशा में जातक के परिवार में सुख ,शांति,कार्य सिद्धि ,यश,धन लाभ आदि में आश्चर्य जनक फल मिलने लगते हैं !
८- संकटा - इस दशा में यथा नाम रोग,शोक आदि संकटों के कारण व्यक्ति को त्रस्त करता है,संकटों से मुक्ति के लिए मातृ रूप में योगिनी की उपासना करें तो देवी की कृपा होने लगती है !
नोट - योगिनी दशाओं को अनुकूल बनाने के लिए निम्न प्रकार से साधना करें --
माह के किसी शुक्ल पक्ष की सप्तमी से पूर्णिमा तक प्रत्येक योगिनी दशा के कारक ग्रह के दिन से संबन्धित योगिनी दशा के कारक ग्रह के ५-५ हजार जप पूर्ण कर लें !
संकटा दशा के कारक ग्रह के लिए रविवार ,राहु के लिए तथा मंगलवार के लिए केतु को चुनें !
इसी प्रकार मंगला के कारक ग्रह चंद्रमा के लिए सोमवार !
पिंगला के लिए रविवार !
धान्या के कारक ग्रह गुरु के लिए गुरुवार !
भ्रामरी के कारक ग्रह मंगल के लिए मंगलवार !
भद्रिका के कारक ग्रह बुध के लिए बुधवार !
उल्का के कारक ग्रह शनि के लिए शनिवार !
सिद्धा के कारक ग्रह शुक्र के लिए शुक्रवार !
योगिनी दशाओं का कुल समय १ वर्ष से आरंभ होकर क्रमश: २-३-४-५-६-७-और ८ वर्षों का होता है ,जीतने वर्ष तक योगिनी दशा का समय जन्म पत्रिका के अनुसार चल रहा हो ,उतने वर्ष में निरंतर नहीं तो अपनी समय की सुविधानुसार कुछ-कुछ अंतराल से योगिनी दशाओं के समय -काल में उनके मंत्र का प्रयोग अवश्य करते रहें --
साधना -वांछित मंत्र प्रयोग साधना के लिए पीला वस्त्र ,पीला आसन ,गो घृत का दीपक प्रज्वलित कर बैठे ,नवग्रह यंत्र अपनी पूजा में ध्यान के लिए स्थापित कर लें !
जप के बाद प्रत्येक दिन ५ देवी रूप कन्याओं को भोजन कराकर उनसे आशीर्वाद ग्रहण करें ,पूर्णिमा को नवग्रह यंत्र पूजा स्थल में स्थाई रूप से स्थापित कर देवें ,तदनंतर नित्य १ माला उस योगिनी देवी के मंत्र का जप करते रहें ,जिनकी दशा आप भोग कर रहे हों !
१- मङ्गला देवी - ॐ नमो मङ्गले मङ्गल कारिणी मङ्गल मे कुरु ते नम :!
२- पिङ्गला देवी - ॐ नमो पिङ्गले वैरिकारिणी प्रसीद-प्रसीद नमस्तुभ्यं !
३- धान्या देवी - ॐ धान्ये मङ्गल कारिणी मङ्गल मे कुरु ते नम : !
४- भ्रामरी देवी - ॐ नमो भ्रामरी जागतानामधीश्वरी भ्रामर्यै नम : !
५- भद्रिका देवी - ॐ भद्रिके भद्रं देहि -देहि अभद्रं दूरी कुरु ते नम :!
६- उल्का देवी - ॐ उल्के विघ्न नाशिनि कल्याणं कुरु ते नम : !
७- सिद्धा देवी - ॐ नमो सिद्धे सिद्धिं देहि नमस्तुभ्यं !
८- संकटा देवी - ॐ ह्रीं संकटे मम रोगं नाशय -नाशय स्वाहा !
जातक की जन्म-पत्रिका में जिस योगिनी की दशा चल रही है ,उसकी पूजा -अर्चना करने की विधि है !
१- मंगला - इस दशा में मंगला देवी की कृपा जिस व्यक्ति पर हो जाती है ,उसको हर प्रकार के सुखों से सम्पन्न कर देती है !
२-पिंगला - इस दशा में पिंगला देवी की कृपा से जातक के सारे विघ्न शान्त हो जाते हैं ,धन-धान्य और उन्नति के सारे मार्ग प्रशस्त हो जाते हैं !
३-धान्या- इस दशा में धान्या देवी की कृपा से जातक को धन-धान्य की कभी क्षति नहीं होती है !
४- भ्रामरी - इस दशा में यदि भ्रामरी देवी की कृपा हो जाय तो शत्रु पक्ष पर विजय,समाज में मान-सम्मान तथा अनेक लाभ के अवसर आने लगते हैं !
५- भद्रिका - इस दशा में शत्रु का शमन और जीवन में आए समस्त व्यवधान समाप्त होने लगते हैं !
६- उल्का - इस दशा में जातक के किए गए कार्यों में किसी भी प्रकार से यदि विघ्न आ रहे हैं और अपनी दशा में उल्का देवी की व्यक्ति पर कृपा हो जाय तो तत्काल व्यक्ति के समस्त कार्यों में गति आने लगती है !
७- सिद्धा- इस दशा में जातक के परिवार में सुख ,शांति,कार्य सिद्धि ,यश,धन लाभ आदि में आश्चर्य जनक फल मिलने लगते हैं !
८- संकटा - इस दशा में यथा नाम रोग,शोक आदि संकटों के कारण व्यक्ति को त्रस्त करता है,संकटों से मुक्ति के लिए मातृ रूप में योगिनी की उपासना करें तो देवी की कृपा होने लगती है !
नोट - योगिनी दशाओं को अनुकूल बनाने के लिए निम्न प्रकार से साधना करें --
माह के किसी शुक्ल पक्ष की सप्तमी से पूर्णिमा तक प्रत्येक योगिनी दशा के कारक ग्रह के दिन से संबन्धित योगिनी दशा के कारक ग्रह के ५-५ हजार जप पूर्ण कर लें !
संकटा दशा के कारक ग्रह के लिए रविवार ,राहु के लिए तथा मंगलवार के लिए केतु को चुनें !
इसी प्रकार मंगला के कारक ग्रह चंद्रमा के लिए सोमवार !
पिंगला के लिए रविवार !
धान्या के कारक ग्रह गुरु के लिए गुरुवार !
भ्रामरी के कारक ग्रह मंगल के लिए मंगलवार !
भद्रिका के कारक ग्रह बुध के लिए बुधवार !
उल्का के कारक ग्रह शनि के लिए शनिवार !
सिद्धा के कारक ग्रह शुक्र के लिए शुक्रवार !
योगिनी दशाओं का कुल समय १ वर्ष से आरंभ होकर क्रमश: २-३-४-५-६-७-और ८ वर्षों का होता है ,जीतने वर्ष तक योगिनी दशा का समय जन्म पत्रिका के अनुसार चल रहा हो ,उतने वर्ष में निरंतर नहीं तो अपनी समय की सुविधानुसार कुछ-कुछ अंतराल से योगिनी दशाओं के समय -काल में उनके मंत्र का प्रयोग अवश्य करते रहें --
साधना -वांछित मंत्र प्रयोग साधना के लिए पीला वस्त्र ,पीला आसन ,गो घृत का दीपक प्रज्वलित कर बैठे ,नवग्रह यंत्र अपनी पूजा में ध्यान के लिए स्थापित कर लें !
जप के बाद प्रत्येक दिन ५ देवी रूप कन्याओं को भोजन कराकर उनसे आशीर्वाद ग्रहण करें ,पूर्णिमा को नवग्रह यंत्र पूजा स्थल में स्थाई रूप से स्थापित कर देवें ,तदनंतर नित्य १ माला उस योगिनी देवी के मंत्र का जप करते रहें ,जिनकी दशा आप भोग कर रहे हों !
१- मङ्गला देवी - ॐ नमो मङ्गले मङ्गल कारिणी मङ्गल मे कुरु ते नम :!
२- पिङ्गला देवी - ॐ नमो पिङ्गले वैरिकारिणी प्रसीद-प्रसीद नमस्तुभ्यं !
३- धान्या देवी - ॐ धान्ये मङ्गल कारिणी मङ्गल मे कुरु ते नम : !
४- भ्रामरी देवी - ॐ नमो भ्रामरी जागतानामधीश्वरी भ्रामर्यै नम : !
५- भद्रिका देवी - ॐ भद्रिके भद्रं देहि -देहि अभद्रं दूरी कुरु ते नम :!
६- उल्का देवी - ॐ उल्के विघ्न नाशिनि कल्याणं कुरु ते नम : !
७- सिद्धा देवी - ॐ नमो सिद्धे सिद्धिं देहि नमस्तुभ्यं !
८- संकटा देवी - ॐ ह्रीं संकटे मम रोगं नाशय -नाशय स्वाहा !

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